Feziya khan

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धीरे धीरे से भाग --- 22



सिद्धांत ने रिया का मुँह बंद करते हुए बोला,, बस कर मेरी माँ अब पता नहीं क्या क्या बोले जा रहीं है अनाप सनाप कही अच्छा अच्छा भी बोला कर खुद तो डरी हुई है और मुझे भी डरा रहीं है ऐसा वैसा कुछ नहीं होगा दोनों आ जाएँगे,,,



मै दोनों की प्रेम की नैया को पार लगाने मै लगा हुआ हूँ और एक तुम हो की उसे डुबोने की सोच रहीं हो कुछ अच्छा नहीं सोच सकती तो कुछ बुरा भी तो ना सोचो,,,,



तुम्हे उनकी फ़िक्र है ये सोचो वो दोनों गयें तो अलग अलग है अगर दोनों मे सब अच्छा हुआ तो एक हो कर ही आएंगे, 


तो सोचो कितना अच्छा होगा,,,



रिया बोली,, हाँ कह तो तुम ठीक ही रहे हो



सिद्धांत उसकी कमर मे अपनी बाहे डालता हुआ बोला तो अब तुम भी कुछ? ये कह कर वो उसके और करीब आने लगा,,,,,,



रिया ने उसे मुस्कुराते हुए जवाब दिया तुम नहीं सुधरने वाले ना मै सीरियस हूँ और तुम्हे रोमांस सूज रहा है,,,



सिद्धांत बोला,,, अरे यार ऐसे खुसगुमार मौसम मे भी रोमांस ना करू तो क्या करू यहाँ खड़े हो कर दूर से ही बस तुम्हे तड़ता रहु,,, 

कभी तो तुम भी रोमांटिक हो जाया करो,,, हर टाइम ये कद्दू से मुँह बनाये रहती हो और उसपर ढाई किलो का गुस्सा,,,,

सिद्धांथ उसे परेशान करने लग गया थ क्यों की वो उसका दिमांग दूसरी तरफ से हटाना चाहता था 

रिया ने उसकी तरफ देखा और घूरते हुए बोली,,   हाँ हाँ क्यों नहीं अभी होती हूँ ये बोल कर वो उसकी और आगे आई उसके गालों तक आई और हलके से चपत मार कर भाग गई,,,,



सिद्धांथ उसके बिछे भागा रुक रिया की बच्ची तुझे नहीं छोडूंगा अब एक बार हाथ आ जा बस,,,


रिया भागने मे माहिर थी उसे पकड़ पाना सिद्धांथ क्या किसी के भी बस का नहीं था रेस मे वो चेम्पियन थी कभी पेड़ो के पीछे तो कभी वहाँ पड़ी मेज के आगे पीछे गुम रहीं थी रिया और सिद्धांत को चिड़ा रहीं थी आओ ना आओ क्या हुआ दम नहीं है क्या मुझे पकड़ कर दिखाओ तो जानू,,,




सिद्धांथ बोला हाँ अच्छे से जानती हो ना की मै तुम्हे पकड़ नहीं सकता इसलिए इतना भाव खा रहीं हो,,,,



रिया और हँसते हुए बोली,,, अब तुम बात को बदल रहे हो अगर तुम ने मुझे पकड़ लिया ना तो तुम्हे वो मिल जायेगा जो तुम चाह रहे थे,,,,,



सिद्धांथ की आँखे चमक उठी और बोला अपनी बात से मुकर मत जाना,,,,



रिया बोली कभी मुकरी हूँ, जो आज मुकरूंगी,, 


ये कह कर वो और तेज़ भागने लग गई,,,, 


सिद्धांथ का भागते हुए अचानक से पैर मूड गया और उसकी बहुत तेज़ चीखा निकल गई और वही वो  मेज पर बैठ गया मुँह बनाते हुए आह आह कर रहा था और अपने पैर को सेहला रहा था,,,,, पहले तो रिया को लगा की सिद्धांथ नाटक कर रहा है पर उसके करहाना उससे देखा नहीं गया,,,,



रिया भी ये देख कर उसके पास आ गई और बोली,, मुझे दिखाओ कहा लगी है,,,,


सिद्धांथ ने जैसे ही उसे अपने इतने करीब देखा उसने जल्दी से अपनी बाहों मे भर लिया और बोला अब बोलो जानेमन क्या इरादा है,,,



रिया बोली,,, ये गलत है तुम ने चीटिंग की है वो  उससे खुद को छुड़ाने लगी,,,



सिद्धांथ बोला देखो यार इश्क़ और जंग मे सब जायज़ है कुछ सही गलत नहीं होता बस सामने जीत दिखाई देती है और कुछ नहीं,,, अब अपना वादा पूरा करो,,,



रिया ने सड़ा सा मुँह बनाते हुए कहा,,, कोई वादा सादा नहीं है मै इस जीत को जीत नहीं मानती,,,


ये कह कर उसने गुस्से मे अपना मुँह दूसरी ओर कर लिया  सिद्धांथ ने उसे अपनी ओर घुमाया और उसकी आँखो मे देखता हुआ 

 

रिया के चेहरे को अपने दोनों हाथो मे ले लिया और उसे अपनी और करने लगा,,,,


रिया ने भी अपनी दोनों आँखे घबराहट मे बंद कर ली,,,,



सिद्धांथ ने मुस्कुराते हुए उसके माथे पर किश किया और उसे छोड़ दिया,,,,,


रिया की थमी हुई साँसो ने धीरे धीरे साँसे लेना शुरू की,,,



सिद्धांथ रिया की ऐसी हालत देख कर मुस्कुरा रहा था,,,


सिद्धांत का प्यार सच्चा है क्या रिया के घर वाले दोनों की शादी के लिए रजी होंगे या रिया भी मोहब्बत की जंग हार मान लेगी या अपने प्यार के लिए सब से लड़ेगी आखिर क्या होदा दोनों की मोहब्बत का अंजाम जानने के लिए जुड़े रहे,




फेजिया खान





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3 Comments

kashish

24-Sep-2023 12:09 PM

V nice

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madhura

24-Sep-2023 12:02 PM

Amazing

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Anjali korde

17-Sep-2023 10:48 AM

Nice

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